10 February, 2014


FOUR LETTER WORD CALLED "LOVE"!

Bits and pieces of me,

Remain in the shadows forever,

Heard in the murmurs of time,

Is the narration, of the days gone by.

All that was loved, is cherished no more,

Few distinct memories, are now colored gray,

Imprinted on the floor are just the foot prints,

My only claim, of ever living with my near and dear.

Of all the emotions, if I was ever true,

Hurt, distrust, lust, heartbreak have now redefined me.

Clothes I wore of trust and dignity,

Are now rags of indecent agony.

What bequeath should I leave behind?

For there are no takers of emotive wealth,

Where's the time to relish the enduring,

When one can just pick and choose.

Is this the road for me to close?

Is this how this would end?

Where on Earth would I be?

If not in the hearts of the loving and free!


Surojit Sengupta - 28th January 2014

27 January, 2011

बिस्मिल


मरहूम 2 की  कोई  उम्र  नहीं  होती ,
अटकी  हुई  सांस , बस  निकल  जाती  हैं , 

वोह  दुनिया  से  परे , उस  जहां  का  राही हैं ,
जहाँ  सुबह  शाम  के  बीच , कोई  लकीर  नहीं  होती 

मरहूम  की  कोई  उम्र  नहीं  होती ,

ज़ात  पूछे  भी  अगर  कोई  अश्कों 3 से ,
तोह  वोह  आहों  की  कहता  हैं ,

जो  गिरे  हैं  आखों  से ,
उन  अश्कों  की  कोई  पहचान  नहीं  होती 

मरहूम  की  कोई  उम्र  नहीं  होती ,

क्या  कुरेदोगे , ख़ाक  युहीं  ज़मीन  से ,
बाद  जाने  के,  सब  जज़्बात  बिखर  जाते  हैं ,

पुकारे  जितना  भी  कोई  प्यार  से ,
यादों  में  कभी  कोई  आवाज़  नहीं  होती 

मरहूम  की  कोई  उम्र  नहीं  होती !
 1.Bismil – Dead one/ Blessed one, 2.Marhoom – Deceased, 3. Ashq – Tears

19 January, 2011

निश्चय

मैं थका मांदा, भटका राहें,
लक्ष्य, दूर निकलने को हैं ,
हाथ बढ़ाये , आँखें गढ़ाए उठ चला हूँ ,
कोई साथ आये , न आये , कदम चल पडे मंजिल को हैं

गिनती की हैं सांसें अपनी ,
जीवन धारा सिमटने को हैं ,
हर एक सांस की देके दुहाई ,
सब्र का बाँध ,अब टूटने को हैं ,

मैं थका मांदा, भटका राहें,
लक्ष्य, दूर निकलने को हैं ,


घने मेघ मंडलाए क्षितिज पर ,
प्रचंड तेज बरसाने को हैं ,
उठे गहेन आंधी कई ,
हवाओं की दिशा अब बदलने को हैं


हाथ बढ़ाये , आँखें गढ़ाए उठ चला हूँ ,
कोई साथ आये , न आये , कदम चल पडे मंजिल को हैं

27 November, 2010

नींद!

रात ठहरी हैं अभी, वक़्त अभी हैं बाकी,
वो दूर कहीं रौशनी का, अभी एक ही सिक्का उछला हैं,


नए रिश्तों की बीज बोई हैं, जज्बातों को सींचना अभी हैं बाकी,
कुछ पुरानी यादों का, अभी एक ही दौर गुज़रा हैं,


कुछ खोया हैं अभी, कुछ पाने की चाहत अभी हैं बाकी,
इन आंसू भरे फ़रियाद से, अभी एक ही क़र्ज़ उतरा हैं,


ख्वाब ठहरी हैं अभी, वक़्त अभी हैं बाकी,
इन आँखों में नींद का, अभी एक ही लम्हा गुज़रा हैं!

20 November, 2010

आंसू!

 आँखों  में  उतरा  हुआ , कुछ  देर  का  मेहमान  हूँ ,
कतरे  दो  बूंदों  के , फुगान -ए -पाबंद  हूँ ,
बहके  रुका  कभी , छलक  के  गिरा ,
तेरे  ही  तकदीर  का , मैं  माज़ी -ए -मुहाफ़िज़  हूँ ,


आँखों  में  उतरा  हुआ , कुछ  देर  का  मेहमान  हूँ .

दीदा -ए -तर  तले , खुश्क  लकीर  सी  बनती  रही ,
बीती  यादों  के  अंधेरे  में , उम्मीद  यूँही  जलती  रही ,
तेरे  ही  ख्यालों  में , बस  रात  भर  जागा  हूँ ,
आँखों  में  उतरा  हुआ  कुछ  देर  का  मेहमान  हूँ .

14 November, 2010

कुछ वक़्त बाद

 बहुत  दिनों  से , कलम  को  मैने  छुआ  नहीं ,
दर्द -ए -आतिश  को , सियाही  में  मैने  डुबोया  नहीं ,
दिल  के  तार  जुडे  हैं , ज़माने  से  मगर ,
ज़माने  को  अपना  हाल -ए -दिल  सुनाया  नहीं !


बहुत  दिनों  से  कलम  को  मैने  छुआ  नहीं ,


फुर्सत  को  रोते  रहे , वक़्त  ने  तनहा  छोड़ा  नहीं ,
दौड़  धुप  भरी  ज़िन्दगी  में , दो  घड़ी लम्हा , जिया  नहीं ,
कलम  का  क्या  हैं , हाथ  से  छुटे  भी  अगर ,
दास्तान -ए -ज़िन्दगी  किसी  कलम  का  मोहताज  तो  नहीं .

बहुत  दिनों  से  कलम  को  मैने  छुआ  नहीं .

05 June, 2010

जो तुमने चाहा

कुछ  बातें  रह  गयी  थी ,
वक़्त  की  धुल , उन  बातों  पे  जम  गयी  थी ,
उन  बातों  को  आज  फिरसे  दोहराए  देता  हूँ ,
लो  तुम्हें  फिरसे  आज  अजनबी  बनाये  देता  हूँ !

इस  मुख़्तसर  सी  ज़िन्दगी  ने , कितनी  लकीरें  खींची  थी ,
वक़्त  की  धुल  से  वोह  लकीरें  अब  धुंधलाई  थी ,
उन  लाकेरून  को  आज  फिरसे  सजाये  देता  हूँ ,
लो  तुम्हें  फिरसे  आज  अजनबी  बनाये  देता  हूँ !

चाँद  बेवफा  सी  दूर  उफक  को  छु  रही  थी ,
आब -ऐ  -जौ  (brilliance of Sunlight), अब  आँखों  में  चुब  रही  थी ,
बड़ी  मुद्दतों  बाद  नींद   से  जागा  हूँ ,
हर  ख्वाब  जो  देखे  थे , उनको  बुझाये  देता  हूँ ,
लो  तुम्हें  फिरसे  आज  अजनबी  बनाये  देता  हूँ !

अब  न  वोह  ‘मैं ’ रहा , न  रही  वोह  ‘तुम ’ थी ,
ज़िन्दगी  के  किसी  मोड़  पर , हो  रही  तुम  ग़ुम  थी ,
उन  रिश्तों  को  आज  फिरसे  मिटाए  देता  हूँ ,
लो  तुम्हें  फिरसे  आज  अजनबी  बनाये  देता  हूँ !

28 May, 2010

सिलसिला -ए -संग -ए -दिल !


किसी  उफनते  दरिया के  बीच , बैठा  पत्थर  कोई ,
ठहरा  हुआ  हैं  ज़िद  पे अपनी , कहता  न  वापस  आऊँगा  ,
संजीदा  हुआ  बैठा  हैं , जाने  किस बात  पर ,
शायद  इस  उम्मीद  में  हैं  के  उसे  मनाये  कोई ,

किसी  उफनते  दरिया  के  बीच  बैठा  पत्थर  कोई !

तेज़  सांसें  चल  रही  हैं , लिए  सीने  में  चुभन  कोई ,
लड़ने  पे  आमादा , कहता  पीछे  न  लौट  पाऊँगा ,
आधा , पानी  में  डूबा  हैं  पर ,
आधा  अभी  और  हैं  उतरना  बाकी ,
शायद  जिंदा  रहने  की  हो  वजह  कोई ,

किसी  उफनते  दरिया  के  बीच  बैठा  पत्थर  कोई !

घटाओं  ने  भेजी  थी , बूंदों  भरी  मक्तूब  कोई ,
न  पढ़ा  उसने , कहता  न  समझ  पाऊँगा ,
वोह  ख़त  जल  कर  ख़ाक  हुई , उसकी  बे -रूखी  पर ,
शायद  ईस  संग -दिली  की  हो  वजह  कोई ,

किसी  उफनते  दरिया  के  बीच  बैठा  पत्थर  कोई !

15 January, 2010

Ashaar'

Dastan-e-fughaan hain, lab-e-khamosh par
Jhuki hui aankhon ka, falak se kya wasta,
Dastaan-e-Hijr hain, waqt ke dehleez par,
Laila ka Farhad se, Shirin ka Qais se kya wasta

Main koi farishta nahin, karoon jo gaur tere fariyad par,
Sang ho chuke is dil ka, duaon se kya wasta,
Ashqbaar ho jaaye gar, kisi ke ruskhsat par,
Aankhon ka sukoon se kya wasta!

Kufr farmatey hain, ‘Kaafir’aankhon ke behakney par,
Zard aankhon ka rangon se kya wasta
Fateha padhtey hain, intkaal farmaney par,
Sard ho chukey aadam ka, Ilaahi se kya wasta!




A cry of pain escapes the silent lips,
Eyes lowered in pain seldom touch the sky,
Tales of separation are listed on time’s threshold
What does Laila have to do with Farhad or Shirin with Qais?

Plead you may, for I am not an angel,
Wishes are mere cry, what’s in it for the stone hearted
Filled with tears they are, when the beloved departs
What do the eyes have to do with contentment?

When the eye wavers, infidel they are
Colors hold no meaning, when eyes go pale
Prayers are said when a man is consigned to the dead,
What does a dead man have to do with god?

07 March, 2009

Aye Meri Zohra Jabeen



Song: Aye Meri Zohra Jabeen
Film: Waqt
Lyrics: Sahir Ludhianvi
Music: Ravi Shanker

This song needs no introduction, it glitters even today. One of Manna Dey’s most popular songs, which has been rendered by many on stage & off it.

Aye meri…is distinct in its mood & naughtiness; this is reflected in the fact that this song has been used to portray the youthful exuberance in Amrish Puri’s character in DDLJ.
Can you forget that scene?

Hope you all do like my rendition and of course, please do not forget to leave your kind comments. It surely helps me to keep going on!

Please do leave your suggestions/ comments/ Feedback; it would truly help me grow as a performer.





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